Friday, 20 July 2018

नदियों के पुनर्जीवीकरण का जन अभियान

मानव सभ्यता के उद्भव से ही नदियों का जीवन में बड़ा महत्व रहा है। नदियां न सिर्फ हमारी प्यास बुझाती है बल्कि किसी न किसी रूप में हमारी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने में भी सहायक होती हैं। गंगा जमुना के मायके उत्तराखंड में नदियों का क्या महत्व है ये किसी से छुपा नहीं। इसलिए नदियों के प्रति हमारा दायित्व और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। यह कटु सत्य है कि बढ़ते शहरीकरण और भौतिकतावाद की दौड़ ने नदियों का प्रवाह रोका है। नदियों का दायरा सिमट रहा है।  द्रोणनगरी देहरादून में शिखर फॉल से निकलने वाली रिस्पना नदी कभी इस शहर की शान हुआ करती थी। प्राचीनकाल में इस नदी को ऋषिपर्णा नदी के नाम से जाना जाता था। लेकिन आज रिस्पना दयनीय दशा में है। कल कल बहने वाली नदी आज एक गंदे नाले में तब्दील हो चुकी है।


जिस दिन से मुख्यमंत्री के रूप में मुझे इस राज्य की सेवा का मौका मिला, मेरे मन में यह सवाल बार बार उठता रहा, कि आखिर रिस्पना की ये दुर्दशा क्यों। इसके लिए हम सब बराबर जिम्मेदार हैं। इसलिए हमारी सरकार ने संकल्प लिया कि हम उत्तराखंड की नदियों, प्राकृतिक स्रोतों, नौलों, धारों और जलस्रोतों के संरक्षण की दिशा में काम करेंगे। शुरुआत के लिए हमने देहरादून की रिस्पना नदी और अल्मोड़ा की कोसी नदी को पुनर्जीवित करने का मिशन शुरू किया। नवंबर 2017 में मैने रिस्पना के उद्गम स्थल शिखर फॉल पर जाकर मिशन रिस्पना से ऋषिपर्णा का संकल्प लिया था। तब मुझे ये उम्मीद नहीं थी कि हमारी सोच एक जन आंदोलन बन जाएगी। यकीन मानिए आज जिस तरह का सहयोग इस मिशन में मिल रहा है, वो दिन दूर नहीं जब हमारी रिस्पना नदी अपने प्राचीन स्वरूप ऋषिपर्णा में बदल जाएगी।


रिस्पना को बचाने के संकल्प में सबसे पहले हमारे दिमाग में यह बात थी कि वृक्षारोपण के जरिए ही इस नदी को बचाया जा सकता है। इसलिए मानसून सीजन में वृक्षारोपण अभियान शुरू करने से पहले हमने 19 मई 2018 को गड्ढा खोदने का कार्य शुरू किया। इस कार्य में शहर के बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं, युवाओं यानी समाज के हर वर्ग ने बढ़ चढ़कर हिस्स लिया। हमें अंदाजा होने लगा कि यह संकल्प अब केवल सरकार का नहीं रह गया बल्कि यह जन जन का मिशन बन चुका है।रिस्पना की तरह अल्मोड़ा की कोसी नदी को पुनर्जीवित करने के संकल्प पर भी आगे बढ़ते जा रहे हैं। हमारे लोकपर्व हरेला ने हमारी इस मुहिम को और भी बल दिया। हरेला पर्व के अवसर पर 16 जुलाई 2018 को अल्मोड़ा के रुद्रधारी नामक स्थान पर हमने वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत की। समाज के हर वर्ग की भागीदारी इस पुनीत मिशन में रही। इसी वजह से मात्र एक घंटे में कोसी के तट पर एक लाख 67 हजार 755 पौधे रोपे गए। इस सफल कीर्तिमान को जल्द ही लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज कराया जाएगा। 


जाहिर सी बात है कि कोसी तट पर वृक्षारोपण का जो मानदंड स्थापित हुआ है उसे पार करने के लिए हमने 22 जुलाई को रिस्पना तट पर वृक्षारपोण का महाअभियान तय किया है। इस कार्यक्रम में 40 से ज्यादा स्कूलों के बच्चे, समाजसेवी व पर्यावरण संगठन, महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग, छात्र सभी इसमें भागीदारी करेंगे। कुल मिलाकर 22 जुलाई को रिस्पना नदी के किनारे ढाई लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।


मैं इस ब्लॉग के माध्यम से आप सभी सुधी जनों से अपील करता हूं, कि धरती को संवारने, पर्यावरण बचाने और हमारे जलस्रोतों के संरक्षण का अभियान किसी एक व्यक्ति या एक सरकार का अभियान नहीं है। यह एक व्यापक जन अभियान है, और इस पुनीत संकल्प को पूरा करने में आप सभी अपना योगदान दें। हमारा प्रदेश प्रकृति के बेहद करीब है, इसलिए हमारी जिम्मेदारी भी उतनी ही ज्यादा है। यह गंगा की धरती है, भगीरथ की धरती है, तो क्या हम सब मिलकर रिस्पना और कोसी को बचाने का भगीरथ प्रयास नहीं कर सकते? हम वृक्षारपोण की सीख देने वाले हरेला त्योहार को मनाते हैं, इसलिए हम सभी के मन में ये भाव जरूर होना चाहिए कि हमारे जलस्रोतों के संरक्षण की जिम्दारी भी हमारी ही है। जिस तरह कभी ब्रिटेन के लोगों ने वहां की प्रदूषित टेम्स नदी को जन जन की सहभागिता से एक स्वच्छ नदी में तब्दील किया है. मुझे भी पूरी उम्मीद है कि आप सभी के सहयोग से हम रिस्पना, कोसी और प्रदेश की अन्य नदियों को पुनर्जीवित करने के प्रयास में जरूर सफल होंगे।धन्यवाद।


Wednesday, 20 June 2018

देवभूमि से योगभूमि तक का सफर


अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जन जन के प्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का देवभूमि पधारने पर हार्दिक अभिनंदन करता हूं। मुझे बड़ी प्रसन्नता है कि योगभूमि उत्तराखंड की पावन धरती पर इस बार योग के महाकुंभ का आयोजन हो रहा है। इस बार 50 हजार से ज्यादा लोगों को प्रधानमंत्री जी के सानिध्य में उत्तराखंड के स्वच्छ वातावरण में योग करने का सुखद सौभाग्य मिल रहा है। उत्तराखंड वासियों में इस योगपर्व के लिए खासा उत्साह दिख रहा है।


योग दिवस के प्रस्ताव की वैश्विक स्वीकारोक्ति एक परिवर्तनकारी घटना है। याद कीजिए 27 सिबंतर 2014 का दिन, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में वैश्विक शांति और समृद्धि के लिए योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था। यह एक ऐतिहासिक पल तो था ही, हर भारतवासी के लिए गौरव का क्षण भी था। इस प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र में रिकॉर्ड तीन महीनों में सहमति बनी और 11 दिसंबर 2014 को यूएन ने इस प्रस्ताव को मंजूर किया और 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की घोषणा की। योग के लिए संपूर्ण विश्व के एकजुट होने की घटना कोई सामान्य घटना नहीं थी। इसी तरह योग के लिहाज से 21 जून 2018 की तारीख भी उत्तराखंड के लिए एक परिवर्तनकारी घटना होगी।

      देवभूमि उत्तराखंड में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन किसी वरदान से कम नहीं है। उत्तराखंड योग और अध्यात्म की राजधानी रही है। यहां की कंदराओं में प्राचीन काल से ऋषि-मुनियों ने तप और योग किया है। योग यहां की धरा से प्रवाहित हुआ है, इसलिए एक बार फिर योग के महाकुंभ के आयोजन की जिम्मेदारी मिलना हमारा सौभाग्य है। यह दिन उत्तराखंड के इतिहास में एक परिवर्तनकारी दिन साबित होगा। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री जी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।
      हम सभी जानते हैं कि आने वाले समय में उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में पर्यटन का बहुत बड़ा योगदान होगा। योग और आध्यात्मिक पर्यटन इस क्षेत्र में विशेष योगदान दे सकते हैं। देवभूमि की धरा से जब योग का संदेश दुनिया के कोने कोने में जाएगा तो यह विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में सहायक होगा। उत्तराखंड को योगभूमि के तौर पर पहचान मिलेगी। हमारे प्रदेश के युवाओं को योग और पर्यटन से जुड़ने का अवसर मिलेगा और बड़ी मात्रा में रोजगार सृजित होंगे। इस तरह योग न सिर्फ हमें स्वस्थ रखने का जरिया बनेगा, बल्कि प्रदेश की आर्थिक सेहत सुधारने में भी सहायक साबित होगा। हमारी सरकार 13 जिलों में 13 नए पर्यटक स्थल विकसित करने पर आगे बढ़ रही है। इस तरह पर्यटन को योग और अध्यात्म से जोड़कर हम प्रदेश को नई दिशा प्रदान कर सकते हैं।

  योग स्वास्थ और कल्याण का समग्र दृष्टिकोण है। योग केवल व्यायाम भर ना होकर अपने आप से  प्रकृति के साथ तादात्मय को प्राप्त करने का माध्यम है। यहहमारी जीवन शैली में परिवर्तन लाकर तथा हमारे अंदर जागरूकता उत्पन्न करके केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक समस्याओं से लड़ने में सहायक सिद्ध हो सकताहै।  
समस्त मानवजाति के कल्याण के लिए उठाए गए इस ऐतिहासिक कदम ने भारत के महान दर्शन सर्वेभवंतु सुखिनसर्वे संतु निरामया: के भाव को चरितार्थ किया है।
आइए हम सब मिलकर प्रधानमंत्री जी द्वारा दिए गए विश्वकल्याण के इस योग मंत्र को अपनाकर जीवन में आनंद की अनुभूति प्राप्त करें।


Saturday, 28 April 2018

महिलाओं को सशक्त बनाएगा पिरूल, निकलेगी बिजली, बढ़ेगा रोजगार



अमूल्य वन संपदा से भरपूर उत्तराखंड के जंगल अब आय का जरिया बनने के साथ साथ बिजली उत्पादन का साधन भी बनेंगे। उत्तराखंड की भौगोलिक स्थितियों को देखें, तो कुछ समय से चीड़  के जंगल तेजी से बढ़ रहे हैं। उत्तराखंड में 4 लाख हेक्टेयर वन भूमि है, जिसमें से 16.36 प्रतिशत में चीड़ के वन हैं। चीड़ की पत्तियां जब तक हरी रहती हैं तब तक तो इन्हें पशुओं के बिछावन के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है, लेकिन बाद में इसका उपयोग नहीं हो पाता। गर्मियों से पहले चीड़ की शंक्वाकार पत्तियां गिर जाती हैं, सूखने पर यही पत्तियां पिरूल कहलाती हैं। लेकिन गर्मियों के दिनों में यही पिरूल वनाग्नि का कारण बन जाता है। किसी भी मिश्रित वन में इस पिरूल पर तेजी से आग फैलती है, जो पूरे जंगल को चपेट मे ले लेती है, इससे वन संपदा के साथ जनहानि, पशुहानि भी होती है।
हमारे उत्तराखंड में ऐसी कई तरह की चुनौतियां हैं। लेकिन हमारी सरकार ने हमेशा इन चुनौतियों के बीच समाधान की तलाश की है। हमने उत्तराखंड में पिरूल नीति लागू कर, चीड के वनों को राजस्व का जरिया बनाया है, पिरूल के उपयोग से बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।


क्या है पिरूल नीति
सरकार चीड़ की पत्तियों का सदुपयोग करेगी। पिरूल को व्यावसायिक उपयोग में लाकर इनसे विद्युत उत्पादन और बायोफ्यूल उत्पादन किया जाएगा। पिरूल से हर साल 150 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य है। बिजली उत्पादन के लिए राज्य में विक्रिटिंग और बायो ऑयल संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इन संयंत्रों के स्थापित होने से पिरूल को प्रोसेस किया जाएगा व बिजली उत्पादन किया जा सकेगा। ये संयंत्र स्वयंसेवी संस्थाओं, औद्योगिक संस्थानों, ग्राम पंचायतों, वन पंचायतों, महिला मंगल दलों द्वारा संचालित किए जाएंगे। प्रदेश में ऐसी करीब 6000 इकाइयां स्थापित करने की योजना है।
पिरूल से बायोफ्यूल और बिजली बनाने के लिए एक किलोवाट की इकाई स्थापित करने में करीब एक लाख रुपए तक का खर्च आता है। लेकिन 25 किलोवाट तक की इकाइयों को एमएसएमई के तहत अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। 25 किलोवाट तक की एक इकाई से सालभर में 1 लाख 40 हजार यूनिट बिजली और करीब 21 हजार किलो चारकोल निकलेगा। इसे बेचने से 9.3 लाख रुपए तक की आय प्राप्त हो सकती है।

रोजगार और महिला सशक्तीकरण का जरिया बनेगा पिरूल
पिरूल नीति से महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण और रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी। पिरूल संयंत्र तक जंगलों से पिरूल कलेक्ट करने में स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा। वन पंचायत स्तर पर महिला मंगल दलों को इसकी जिम्मेदारी दी जाएगी। इस तरह महिलाएं घर बैठे रोजगार प्राप्त कर सकेंगी, और आर्थिक रूप से सशक्त बनेंगी। महिला समूहों और महिला वन पंचायतें की भूमिका और भी सशक्त हो सकेगी। चूंकि प्रदेश में ऐसे करीब 6 हजार पिरुल संयंत्र स्थापित करने की योजना है, अगर एक संयत्र से 10 लोगों को भी रोजगार मिले तो कुल 60 हजार लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिल सकेगा। इस तरह पलायन पर बहुत हद तक रोक लग सकेगी।

इस तरह पिरूल नीति महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण में उपयोगी साबित होगी। हमारी सरकार ने महिलाओं के उत्थान के लिए कई कदम उठाए हैं। मंदिरों के प्रसाद से महिलाओं की आर्थिकी को संवारने की योजना, एलईडी उपकरणों के निर्माण की ट्रेनिंग देकर उनमें व्यावसायिकता को बढ़ावा देना और ग्रोथ सेंटर में महिलाओं को रोजगार देने के बाद अब हमने पिरूल को उनकी आमदनी से जोड़ा है।

मैं उत्तराखंड की नारीशक्ति को यकीन दिलाना चाहता हूं कि हम मन वचन कर्म से महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में दिन रात जुटे हैं। पिरूल नीति भी अलग अलग आयामों से उत्तराखंड के विकास में कारगर साबित होगी, ऐसा मुझे विश्वास है।


                                                (त्रिवेंद्र सिंह रावत)
                                                मुख्यमंत्री, उत्तराखंड।

Thursday, 8 March 2018

आधी आबादी को मिले पूरा हक


8 मार्च दुनिया का इतिहास में बेहद खास दिन है। ये दिन दुनिया की आधी आबादी के नाम समर्पित है। ये दिन समाज के उस बड़े हिस्से के लिए महत्वपूर्ण है जिसके बिना संसार की कल्पना अधूरी रह जाती। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के इस पावन मौके पर मैं आप सभी लोगों का अभिनंदन करता हूं। दुनिया की आधी आबादी हमारे लिए न केवल सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों की महत्वपूर्ण धुरी है, बल्कि नारी को हमारे शास्त्रों में देवतुल्य स्थान मिला है। इसीलिए कहा गया है

यत्र नार्यस्तु पूज्यंते.....रमंते तत्र देवता

यानी जहां नारियों की पूजा होती है, वहां देवताओं का वास होता है।
आप सोचिए जन्म देने के लिए मां चाहिए, राखी बांधने के लिए बहन चाहिए, लोरी सुनाने के लिए दादी चाहिए, जिद पूरी करने के लिए मौसी चाहिए, खीर खिलाने के लिए मामी चाहिए, साथ निभाने के लिए पत्नी चाहिए, पर ये सभी रिश्ते निभाने के लिए महिला जरूरी है। इसलिए हमारे समाज में महिला, जन्म से लेकर मृत्यु तक जीवन के हर पहलू का आधार है। और अगर हम अपने आधार को मजबूत नहीं कर पाते तो हम कभी पूर्ण नहीं हो सकते, हम खोखले रह जाएंगे।

हमारे प्राचीन शास्त्रों में भी नारी के महत्व को समझा गया गया है। इसीलिए लिखा गया है.....

अहल्या द्रौपदी तारा कुंती मंदोदरी तथा।
पंचकन्या: स्मरेतन्नित्यं महापातकनाशम्||

अर्थात् अहिल्या, द्रौपदी, कुन्ती, तारा तथा मन्दोदरी, इन पाँच कन्याओं का स्मरण मात्र से संपूर्ण पापों का विनाश होता है।

और आज हम महिला दिवस के पावन अवसर पर यहां हैं तो महिला उत्थान के लिए हमें भी कुछ रूढ़ियों, असामनताओं, और अंधविश्वासों का विनाश करना होगा। हमें महिलाओं के बेहतर भविष्य के लिए उनका वर्तमान संवारना होगा इसीलिए बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा, समृद्धि और सशक्तिकरण के लिए हमें अभी से कदम उठाने होंगे।

हमारा प्रदेश तीलू रौतेली, रामी बौराणी, गौरा देवी का प्रदेश है। इसलिए यहां महिलाओं को क्या सम्मान मिलना चाहिए यह हम सब अच्छी तरह समझते हैं। हमें याद है उत्तराखंड आंदोलन के दौरान भी हमारी सैकड़ों माताओं, बहनों ने बढ़चढ़कर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। इसलिए नारी शक्ति के सम्मान और उत्थान के लिए प्रयास करना हम सबका परम कर्त्व्य है।

जब हम महिलाओं को सक्रिय प्रतिनिधित्व देने क बात करते हैं, तो मुझे इस बात की खुशी है कि हमारी विधानसभा में वर्तमान में 5 महिला विधायक हैं, नेता प्रतिपक्ष भी महिला हैं और हमारी सरकार में एक मंत्री महिला हैं। महिला सशक्तिकरण के इस उत्तम उदाहरण के साथ हम प्रेरणा लेकर आगे बढ़ सकते हैं।


ये भी हमारे समाज की कड़वी सच्चाई रही है कि महिलाओं को जीवन में कदम कदम पर लैंगिक भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
लेकिन अब समय बदल रहा है, इसलिए आईए आज के दिन पर हम ये संकल्प लें कि किसी भी कीमत पर महिलाओं के साथ भेदभाव नहीं होंने देंगे।

हमारी सरकार ने भी महिला सशक्तीकरण और समाज में उनकी बराबर भागीदारी के लिए प्रयास किए हैं।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
महिलाओं के भविष्य के लिए बेटियों का आज सुरक्षित करने की सोच पर चलकर प्रधानमंत्री मोदी ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना शुरू की थी।
कुछ लोग कहते थे कि ऐसी बातें करने से खास फर्क नहीं पड़ता...लेकिन मैं आपको एक उदाहरण देता हूं कि बेटी बचाओ की सामूहिक पहल क्या रंग ला सकती है।
उत्तराखंड का पिथौरागढ़ जिला लिंगानुपात के मामले में देश के सबसे पिछड़े जिलों में से एक था। 2011 में यहां प्रति एक हजार बालकों पर मात्र 824 बालिकाएं थी।

लेकिन बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के बाद व्यापक जागरुकता आई। पिथौरागढ़ में सरकार, समाजसेवी संस्थाओं और जनसहयोग से व्यापक जागरुकता अभियान चलाया गया

और पिछले साल हमने पिथौरागढ़ में घर घर जाकर सर्वे कराया। अक्टूबर 2017 में किए गए सर्वे के मुताबिक आज जिले का करीब करीब हर घर बेटियों से गुलजार हुआ है। अब यहां प्रति एक हजार बालकों पर 935 बालिकाएं हो गई हैं।

हमारे प्रदेश में उत्तरकाशी ऐसा जिला है जहां बालिका लिंगानुपात बालकों के मुकाबले ज्यादा है।

उज्जवला
केंद्र सरकार ने गरीब महिलाओं की परेशानियों औऱ सम्मान को ध्यान मे रखते हुए उज्जवला योजना शुरू की थी। इस योजना के बाद धुएं में परेशानियां उठा रही करोड़ों गरीब महिलाओं की तकदीर बदली है। मुझे खुशी है कि इस बार केंद्रीय बजट में उज्जवला योजना के तहत लाभ पाने पाने वाली महिलाओं का आंकड़ा 5 करोड़ से बढ़ाकर 8 करोड़ किया गया है। आप सोचिए महिलाओं की जिंदगी में यह एक कोसिश कितना बड़ा परिवर्तन ला सकती है। उनको स्वस्थ औऱ धुआंमुक्त जीवन देने में सफल रह सकती है।

चूंकि महिलाएं आज समाज में बराबरी के लिए आवाज उठाती रही हैं। इसलिए तकनीक और कौशल दो ऐसी बातें हैं जिनसे ये संभव हो सकता है। केंद्र सरकार की ओर से महिलाओं को सिक्ल डेवलेपमेंट करने के लिए स्टेप योजना चलाई जा रही है जिससे लाखों महिलाएं लाभ ले रही हैं

इसी तरह महिला शक्ति केंद्रों, महिला पुलिस वॉलिंटियर्स और महिला ई-हाट के जरिए भी महिलाओं को समाजिक और आर्थिक रूप से सश्कत बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं

उत्तराखंड में प्रयास
देवभूमि में पर्वतीय क्षेत्र होने के कारण यहां की महिलाएं मुश्किल जीवन जीती हैं। इसलिए हमने उनके उत्थान के लिए योजनाबद्ध ढंग से काम करना शुरू किया है। नवजात बच्चियों का स्वास्थ्य का ख्याल रखते हुए वैष्णवी हेल्थ किट मुहैया कराई जा रही हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में बालिकाएं पीछे न रह जाएं, इसके लिए उनकी शिक्षा में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। मेधावी बालिकाओं सरकार की ओर से लैपटॉप बांटे जा रहे हैं।

किशोरियों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है कि उन्हें मेन्स्ट्रेरशन के बारे में जागरुकता हो, स्वच्छता के लिए जागरुकता हो। इसलिए सस्ती दरो पर सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराने के लिए स्पर्श सैनेटरी नैपकिन योजना शुरू की गई है।
हमने महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए मंदिरों के प्रसाद को आमदनी का जरिया बनाने की पहल की है।बद्रीनाथ के 3 महिला स्वयंसहायता समूहों ने स्थानीय अनाजों से प्रसाद निर्मित किया औऱ उसे स्थानीय रेशों की टोकरी में पैकेजिंग करके बेचा। मुझे खुशी है कि महिलाओं ने पिछले सीजन में 19 लाख का प्रसाद बेचा और 9 लाख रुपए का शुद्ध मुनाफा कमाया। इस सफल प्रयोग को हम उत्तराखंड के 625 प्रमुख मंदिरों में शुरू करने जा रहे हैं।




तकनीक और कौशल में महिलाएं आगे बढ़ें, पुरुषों का मुकाबला करें, इसलिए उन्हें छोटे उद्यमों की ट्रेनिंग दी जा रही है। एक दिन पहले ही हमने थानो में एलईडी उपकरणों के निर्माण के लिए ट्रेनिंग सेंटर की शुरुआत की है, जहां 50 महिलाएं ट्रेनिंग ले रही हैं। महिला दिवस के अवसर पर यह उनके लिए एक तोहफा हमने दिया है।
 हम 670 न्यायपंचायतों को ग्रोथ सेंटर के रूप में विकसित कर रहे हैं। इनमें से इस वर्ष 15 ग्रोथ सेंटर शुरू हो जाएंगे, जहां महिलाओं को कपड़ा बनाने, सिलाई, आदि की ट्रेनिंग दी जाएगी। निश्चित रूप से ये प्रयास महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण में मददगार साबित होंगे।

समाजिक भागीदारी में भी महिलाओं की भूमिका को हम आगे रख रहे हैं। इसके तहत सड़कों के रखरखाव में महिला स्वयंसहायता समूहों की मदद ली जा रही है। हमने प्रदेश में देहरादून औऱ हल्द्वानी में 2 महिला बैंक स्थापित किए हैं, जहां सभी महिला कर्मचारी हैं। हम प्रत्येक जिले में एक एक महिला बैंक स्थापित कर रहे हैं। इस तरह महिलाओं को कामकाज का स्वस्थ व प्रतिस्पर्धी माहौल मिल सकेगा।

आज महिला दिवस के अवसर पर मैं पूरे समाज से ये सकल्प चाहता चाहता हूं कि हम हर हाल में महिलाओं को बराबरी पर लाकर खड़ा करेंगे। सामाजिक भेदभाव, लैंगिक भेदभाव की विषमताओं को तोड़ फेंकेंगे। और स्वस्थ व सभ्य समाज का निर्माण करेंगे
अंत में मैं बस इतना कहूंगा...

हे माता, बहनों, बेटियों..
दुनिया की जन्नत तुमसे है
मुल्कों की बस्ती हो तुम...
कौमों की इज्जत तुमसे है...
धन्यवाद।



Monday, 25 December 2017

अटल जी के सुशासन मंत्र पर आगे बढ़ता उत्तराखंड

बाधाएं आती हैं आएं।
घिरे प्रलय की घोर घटाएं।।
पावों के नीचे अंगारेसिर पर बरसें।
यदि ज्वालाएं निज हाथों में हंसते-हंसते।।
आग लगा कर जलना होगा।
कदम मिलाकर चलना होगा - कदम मिलाकर चलना होगा।



25 दिसंबर का दिन हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन हमारे पूर्व प्रधानमंत्रीभारत रत्न आदरणीय अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मदिन मनाया जाता है।

अटल जी के राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन से हमें दो महत्वपूर्ण शिक्षाएं मिलती हैं.....अनुशासन और सुशासन

अनुशासन तो हम सभी के लिए व्यक्तिगत जीवन में काफी अहम हो जाता है। लेकिन राजनीति में रहकर अगर जनता की सच्ची सेवा करनी है तो सुशासन के बिना पूरी नहीं होती....और अटल जी ने संपूर्ण राजनीतिक जीवन में सुशासन का ही नारा दिया था....इसलिए उनके जन्मदिन को सुशासन दिवस के तौर पर भी मनाया जा रहा है।
सुशासन का मतलब है पारदर्शी और जवाबदेही शासन।

भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी पहले गैर कांग्रेसी नेता थेजिन्होंने पाँच साल प्रधानमंत्री का कार्यकाल पूरा किया। अटल जी नौ बार लोक सभा के लिए एवं दो बार राज्य सभा के लिए चुने गए।

एक बार वाजपेयी जी ने कहा था अंधेरा छटेगासूरज निकलेगाकमल खिलेगा। आज ये बात सच साबित हो गई है।

आज भारतीय जनता पार्टी न सिर्फ दुनिया का सबसे बड़ा राजनैतिक दल बन चुका है बल्कि देश के 67 फीसदी आबादी में हमारी सरकार है। और भाजपा की सरकारें यूं ही लोकप्रिय नहीं हुई हैं, भाजपा ने हमेशा गुड गवर्नेंस को मूल मंत्र बनाकर सरकारें चलाई हैं. यही वजह है कि उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम में लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए भाजपा का परचम लहरा रहा है।

देश में गुड गर्वनेंस का उदाहरण अगर आपको देखना है तो बीजेपी शासित राज्यों का उदाहरण आप ले लीजिए। जो मध्यप्रदेश बीमारु राज्यों मे गिना जाता थाआज वह विकास के नित नए आयाम छू रहा है। छत्तीसगढ़ में डॉ. रमन सिंह की सरकार ने लगातार हैट्रिक बनाई है। गुजरात में बीजेपी का किला 22 साल से अभेद्य रहा है। 

यही कारण है कि 2014 में हमारी 7 राज्यों में सरकारें थी, वो कारवां बढकर आज 19 राज्यों तक पहुंच चुका है। यानि 19 राज्यों में हमारी या हमारे गठबंधन की सरकारें हैं।

मैं आज आपको याद दिलाना चाहता हूँ कि लोकतंत्र के मंदिर अर्थात देश की संसद में 1997 में, जब कांग्रेस भाजपा की कम सीटों पर हंस रही थी, तब भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी ने कांग्रेस के लिए कहा था-
मेरी बात को गांठ बाँध लें आज हमारे कम सदस्य होने पर आप हँस रहे हैं लेकिन वो दिन आयेगा जब पूरे भारत में हमारी सरकार होगी उस दिन देश आप पर हंसेगा
यह उक्ति आज चरितार्थ हुई है। और इसमें वाजपेयी जी के गुड गवर्नेंस के मॉडल का बहुत बड़ा योगदान है।

उत्तराखंड में भी हमने जिस दिन से सरकार संभाली है, स्वच्छ पारदर्शी और गुड गवर्नेंस की सरकार हम दे रहे हैं।

पिछले साढ़े तीन साल में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी एक स्वच्छ पारदर्शी सरकार देश को दी है। इसी गुड गवर्नेंस मॉडल से मोदी जी ने न्यू इंडिया बनाने का संकल्प लिया है। न्यू इंडिया के सपने को पूरा करने के लिए हम कोई कोर कसर बाकी नहीं छोडेंगे। हम इस राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी और जवाब देही शासन देने के लिए कृत संकल्प हैं।

यही सपना भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने देखा था और यही मंत्र प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह जी ने हमें दिया है।

इसीलिए सरकार बनते ही मैंने भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ दी है। आज एनएच-74 का भूमि मुआवजा घोटाला हो, राशन वितरण में गड़बड़ी का घोटाला हो, इनके खिलाफ हमने सख्त एक्शन लिए हैं। दोषियों को जेल तक पहुंचाया है। लेकिन करप्शन के खिलाफ इस पावन यज्ञ में इतना ही काफी नहीं होगा। मुझे इस लड़ाई में आपका साथ चाहिए, ये साथ वैसा ही होना चाहिए जैसा महाभारत के युद्ध में श्री कृष्ण और हनुमान जी ने अर्जुन का निभाया था।

पारदर्शी सरकार देने की दिशा में हमने ट्रांसफर एक्ट लाकर ट्रांसफर पोस्टिंग के खेल को बंद किया है। अब राज्य के हर कर्मचारी को सुगमव दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती का बराबर मौका मिल सकेगा। इससे उसके कामकाज में सुधार आएगा।

खनन माफियाओं पर लगाम लगाने के लिए ई-टेंडरिंग व्यवस्था अपनाई गई है।
एमडीडीए में नक्शे पास कराने के लिए अब लोगों को चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। अब इसकी ऑलनाइन व्यवस्था शुरू की गई है। इससे लोगों का समय भी बचेगा और भ्रष्टाचार भी कम होगा।

गुड गवर्नेंस के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में अटल जी के जन्मदिन के अवसर पर मुख्यमंत्री डैशबोर्ड की शुरुआत की है। इससे सभी योजनाओं और विकास कार्यों की एक साथ मॉनिटरिंग हो सकेगी।

समाधान पोर्टल को मजबूत किया है। किसी भी तरह की शिकायतों के लिए 1905 टोल फ्री नंबर जारी किया

मेरी कोशिश है---- पलायन मुक्त उत्तराखण्ड, भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखण्डभाई-भतीजावाद मुक्त उत्तराखण्डवंशवाद मुक्त उत्तराखण्ड।
और हमारी सरकार का सपना है---- रोजगार युक्त उत्तराखण्डशिक्षित उत्तराखण्ड, संसाधन युक्त उत्तराखंड एक समृद्ध और खुशहाल उत्तराखण्ड।

भारतीय जनता पार्टी केवल इलेक्शन जीतने के मकसद से चुनाव नहीं लड़तीबल्कि समावेशी विकास के जरिए समाज का उत्थान और सबका साथ सबका विकास के नारे के साथ भारत को विश्व गुरु बनाने के संकल्प पर निरंतर बढ़ रही है।

नपी तुली और बेबाक टिप्पणी करने में अटल जी कभी नहीं चूकेमैं आज अटल जी की बात दोहराना चाहता हूँ। अटल जी ने कहा था- "भारत को लेकर मेरी एक दृष्टि है- ऐसा भारत जो भूखभयनिरक्षरता और अभाव से मुक्त हो।" हमें ऐसा भारत बनाना है।

और यह सब गुड गवर्नेंस के जरिए ही संभव हो सकता है। इसलिए प्रिय अटल जी के जन्मदिवस पर हम उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास का संकल्प लेते हैं। एक स्वच्छ व भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड बनाने का संकल्प लेते हैं।





Friday, 1 December 2017

विवेकानंद इंटरनेशनल फाउन्डेशन में रिवर बेसिन मैनेजमेंट विषय पर मेरे विचार

 स्वामी विवेकानंद जी का उत्तराखंड से गहरा रिश्ता है। स्वामी विवेकानंद उत्तराखंड राज्य में 4 बार आए। और जो विषय आज का आपने रखा है रिवर बेसिन मैनेजमेंट वह भी मेरे राज्य के लिए विशेष है। मेरे प्रदेश से निकलने वाली गंगा देश का सबसे बड़ा रिवर बेसिन है। गंगोत्री से गंगासागर तक पांच राज्यों से होते हुए यह 2525 किलोमीटर का सफर तय करती है। देश की सिंचित भूमि का 40 प्रतिशत भाग इसी के पानी पर निर्भर करता है। देश की बड़ी आबादी को खाघ सुरक्षा इसी बेसिन से मिलती है। मतलब साफ है कि मामला आस्था के साथ साथ आजीविका से भी जुडा है। ये तो था मेरे राज्य का गंगा और स्वामी विवेकानंद से नाता।


अब मैं आज के महत्वपूर्ण विषय पर आता हूं। खासकर जब हम रिवर बेसिन मैनेजमेंट की बात करते हैं तो समस्त मानवजाति के जीवन को लेकर हम चर्चा कर रहे हैं। जल है तो कल है,जल है तो जीवन है। जल के बिना जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती। यह बात हर कोई जानता है बावजूद इसके जल की  बूंद बूंद बचाने के लिए अभियान चलना चाहिए वो नहीं दिखाई देता। ये बात किसी से छिपी नही है की हमारी कई नदियां विलुप्त हो चुकी है, कई विलुप्त होने के कगार में है। कई नाला बन चुकी है। कई इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह चुकी है।  हमारे देश में जो 22 बड़े रिवर बेसिन हैं इसमें पानी की जो कमीं आई है वो बताने के लिए काफी है कि इस ओर ठोस कदम नहीं उठाये गए तो हालात खराब होते जाऐंगे। बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण, उघोग और कृषि के क्षेत्र इससे सीधे प्रभावित होंगे।

एक उदाहरण से हम इसे आसानी से समझ सकते हैं। 1991 में औसत सालाना प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता 2209 क्यूबिक मीटर थी जो 2001 में 1816 क्यूबिक मीटर रह गई, 2011 में ये घटकर1545 क्यूबिक मीटर रह गई। और जो अनुमान है उसके मुताबिक 2025 में यह 1340 और 2050 में 1140 क्यूबिक मीटर तक पहुंच जाएगी।  बढ़ती आबादी के चलते इसमें लगातार गिरावट आ रही है। ये आंकड़े पर्याप्त हैं यह बताने के लिए की हालात दिन पर दिन कितने खतरनाक होते जा रहें हैं।

एक और उदाहरण मैं आपके सामने रखता हूं। औऱ उसका मानक है प्रति व्यक्ति पानी का स्टोरेज। रूस में प्रति व्यक्ति पानी का स्टोरेज 6103 क्यूबिक मीटर है। आस्ट्रेलिया में यह 4773 क्यूबिक मीटर है और चीन में यह 1111 क्यूबिक मीटर है। भारत की जब हम बात करते हैं तो यह आंकड़ा भी हैरान करने वाला है यहां प्रति व्यक्ति पानी का स्टोरेज 209 क्यूबिक मीटर हैं। इसका मतलब यह है कि रूस 4 साल तक लागातर सूखे का सामना कर सकता है। आस्ट्रेलिया 3 साल तक मगर भारत एक साल भी सूखे का सामना नहीं कर सकता। और आप सब जानते हैं कि भारत का आज भी 60 फीसदी खेती भगवान के भरोसे है यानि मानसून पर निर्भर करती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने ग्रामीण कृषि सिंचाई योजना के जरिये हर खेत को पानी देने का लक्ष्य रखा है और मैं मानता हूं कि जिस तेजी से काम हो  रहा है हम हर खेत को पानी देने में जरूर कामयाब होंगे।

एक और उदाहरण आपके समाने रखता हूं। भारत में प्रतिदिन 38 हजार 3 सौ 54 मिलियन लीटर sewage generate होता है। मगर जो हमारी (treatment capacity) या शोधन क्षमता है वह केवल 11 हजार 7 सौ 86 मिलियन लीटर per day है। हमें इस स्थिति को बदलना होगा। मैं समझता हूं हमारे विशेषज्ञ इस विषय पर आज जरूर अपनी राय रखेंगे।

एक औऱ बेहद चिंताजनक बात हमारे ground water को लेकर हैं। भूजल का स्तर लगातार गिर रहा है। हमने बिना सोचे समझे भूजल का दोहन किया। जबिक recharge  के बारे में जितना काम होना चाहिए उतना हुआ नही। इसी तरह arsenic contamination के चलते 12 राज्यों के 96 जिलों की हालत चिंताजनक बताई गई है। इससे लोगों और जानवरों के स्वास्थ में विपरित असर पड़ रहा है।

इजरायल की जल संरक्षण के तकनीक आज विश्व  प्रसिद्ध है। खासकर उन्होंने खारे पानी को पीने के लायक बनाया। per drop more crop जो मंत्र हमारे प्रधानमंत्री ने खेती के लिए दिया है इजरायल ने इसके सहारे अपनी खेती में जबरदस्त तरक्की की है। कुछ और देश भी इस ओर काम कर रहे हैं। दुनिया में जल संरक्षण और शोधन के लिए जो अच्छे काम हो रहे हैं उससे हमें सीख लेकर यहां लागू करना चाहिए।

मैं ये मानता हूं की जल संरक्षण में राज्यों की मुख्य भूमिका होनी चाहिए। मुझे जब इस राज्य का नेतृत्व मिला मैने शुरूआत में जल संचय, जीवन संचय कार्यक्रम की शुरूआत की। इसके तहत हमने toilet के सिस्टर्न में एक लीटर पानी , रेत या मिटटी से भरी बोतल डाली। कुल 2लाख 73हजार 222 सिस्टर्न में प्लास्टिक की बोतल रख कर हम सालाना 14 हजार 748 लाख ली0 जल की बचत कर पाऐंगें।

और यह पूरा कार्यक्रम zero budget का है। इसके अलावा हर जिले में  जन जागरूकता अभियान चलाकर 3837 चालखाल, जलकुण्ड, फार्म पौण्ड का निर्माण, 84000 कन्टूर ट्रेंच का निर्माण, 2186चैक डैम का निर्माण, तथा 381 रेनवाटर हारवेस्टिंग स्ट्रक्चर का निर्माण करके 34631.99 लाख ली0 जल संचय क्षमता में वृद्धि का लक्ष्य रखा है। और मैं आप सबको यह भरोसा दिलाता हूं कि हम इस लक्ष्य को पूरा करेंगे। मैने इसी माह दो नदियों रिस्पना और कोसी नदी को rejunuvate करने का बीड़ उठाया है। एक प्रदेश की राजधानी देहरादून की  लाइफलाइन है तो कोसी नदी कुमाऊं की लाइफ लाइन है। धीरे धीरे बाकि नदियों के संवर्धन के लिए भी कार्योजना तैयार की जा रही है। इस काम में सरकार  विशेषज्ञ, धार्मिक गुरू और स्थानीय जनता सबको शामिल किया गया है। आगामी समय में जल स्रोतों के संरक्षण-संवर्द्धन तथा जलश्रोत मैंपिग करने पर काम किया जा रहा है। जल संरक्षण संवर्द्धन के अन्तर्गत सिंचाई विभाग  09 जनपदों में 21 जलाशय और 02 बैराज बना रहा है। इसमें  लगभग 20.675 लाख क्यूबिक मीटर सतही एवं वर्षा जल का भण्डारण किया जा सकेगा।

मेरी सरकार 2022 तक 5000 प्राकृतिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित/संवर्द्धित करने के लक्ष्य रखा है। और ये मेरे लिए Article of faith का मुददा है।

उत्तराखंड में जल विद्युत परियोजना की अपार संभावना है। हमारी जलविद्युत क्षमता 25 हजार मेगावाट है। मगर हम केवल 4000 मेगावाट का ही दोहन कर पा रहे हैं। कुछ पर्यायवरण से जुडे़ पहलु हैं जिनपर काम किया जा रहा है। मुझे विश्वावस है कि इस क्षमता का दोहन राज्य के विकास के लिए आने वाले दिनों में हम कर पाऐंगे।

आखिर में मैं इतना कहूंगा यहां जो मंथन होगा वो भारत के साथ साथ मेरे पहाड़ी राज्य के लिए लाभदायक होगा। मैं देख रहां हूं कि दिल्ली में धूप नहीं खिल रही। कोहरा भी है, प्रदूषण को लेकर भी चिंता है। इसलिए मैं आपको अच्छी धूप, स्वच्छ हवा और शुद्ध भोजन और पानी के लिए देवभूमि उत्तराखंड में आमंत्रित करता हूं। विश्वास रखिए अतिथि देवो भवः में कोई कमी नही आने दी जाएगी। आप जरूर आईये अपने बंधु बांधवों को भी लाईये। आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद।